"ॐ गुरवे नमः — बृहस्पतये नमः"
देव गुरु बृहस्पति भगवान को प्रणाम करते हुए, इस दुर्लभ गोचर का पूर्ण लाभ प्राप्त करने की कामना करते हैं।
गुरु भगवान — परिचय
नवग्रहों में सबसे सात्विक और शुभ ग्रह गुरु (बृहस्पति) हैं। देवताओं के गुरु होने का गौरव प्राप्त है इन्हें। ज्ञान, धर्म, धन, विवाह, संतान सुख, मार्गदर्शन — जीवन के सभी शुभ विषयों पर इनका अधिकार है।
ज्योतिष में एक कहावत है — "गुरु की दृष्टि पड़े तो करोड़ उपकार, गुरु की दृष्टि हो तो दोष सब शक्तिहीन।" इसीलिए गुरु का गोचर (पेयर्ची) हर ज्योतिष प्रेमी के लिए सबसे उत्सुकता से प्रतीक्षित घटना होती है।
गुरु पेयर्ची (गुरु गोचर) क्या है?
गुरु प्रत्येक राशि में लगभग एक वर्ष (औसतन 361 दिन) संचरण करते हैं। 12 राशियों का एक पूर्ण चक्कर लगाने में 12 वर्ष लगते हैं। गुरु का एक राशि से दूसरी राशि में स्थानांतरण ही गुरु पेयर्ची (Jupiter Transit / Guru Gochar) कहलाता है।
हर गोचर महत्वपूर्ण है — लेकिन 2026 का गोचर 12 वर्षों में केवल एक बार आने वाला अपूर्व गोचर है। कारण, इस बार गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर रहे हैं।
2026 गुरु पेयर्ची — तिथि, दिन और नक्षत्र
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| गोचर काल | मई–जून 2026 (वैशाख – ज्येष्ठ माह) |
| पिछली राशि | मिथुन (Gemini) |
| गोचर राशि | कर्क (Cancer) — गुरु की उच्च राशि |
| कर्क में रहने का काल | लगभग एक वर्ष (मई 2027 तक) |
| महत्व | 12 वर्षों में एक बार आने वाली उच्च गुरु स्थिति |
| पूजा का दिन | गुरुवार (बृहस्पतिवार) |
महत्वपूर्ण सूचना: सटीक गोचर समय (नाड़ी) और मुहूर्त विवरण के लिए अपने क्षेत्र का पंचांग देखें। तिरुकणित पंचांग, वाक्किय पंचांग आदि में कुछ घंटों का अंतर हो सकता है।
उच्च गुरु इतने विशेष क्यों हैं?
ज्योतिष शास्त्र में हर ग्रह की एक उच्च राशि (Exaltation Sign) होती है — उस राशि में ग्रह अपनी चरम शक्ति में होता है। गुरु की उच्च राशि कर्क है, उच्च अंश 5°।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
- ज्ञान बल (Buddhi Bala): उच्च गुरु जिन स्थानों पर दृष्टि डालते हैं, वहाँ स्पष्ट निर्णय और सही मार्गदर्शन मिलता है।
- दिक् बल (Digbala): गुरु को पूर्व दिशा में दिक्बल मिलता है। कर्क पूर्व दिशा से जुड़ी जल तत्व राशि है — इसलिए गुरु की शक्ति दोगुनी हो जाती है।
- मैत्री (Friendship): कर्क के स्वामी चन्द्रमा हैं — गुरु के निकट मित्र। देव गुरु अपने मित्र के घर में सम्मानपूर्वक विराजमान होते हैं।
- दोष उपचार: उच्च गुरु जातक में विद्यमान कई दोषों को — मांगल्य दोष, पुत्र दोष, कुज दोष को कुछ सीमा तक — शांत करने की शक्ति रखते हैं।
पौराणिक संबंध: चन्द्रमा की पत्नी तारा का बृहस्पति से विवाह हुआ — पुनर्मिलन के बाद दोनों के बीच सद्भावना बनी। इसीलिए चन्द्रमा के घर (कर्क) में गुरु को सर्वोच्च सम्मान प्राप्त है।
इस काल में बनने वाले प्रमुख योग
यह उच्च गुरु काल अनेक शुभ योगों का निर्माण करता है:
- गजकेसरी योग (Gajakesari Yoga): चन्द्रमा के साथ या चन्द्रमा पर गुरु की दृष्टि — हाथी की शक्ति + सिंह का साहस — यश, धन और ज्ञान।
- गुरु-आदित्य योग (Guru–Aditya Yoga): जब सूर्य कर्क में संचरण करें (जुलाई-अगस्त 2026) — सरकारी मान्यता, पैतृक सम्पत्ति संबंधी शुभ समाचार।
- नीच भंग राजयोग: यदि उच्च गुरु जातक में नीच स्थिति के ग्रह पर दृष्टि डालें (जैसे मकर में मंगल) — दोष राजयोग में परिवर्तित हो जाता है।
- भाग्य स्थान बल: मिथुन और वृश्चिक लग्न वालों के लिए उच्च गुरु भाग्य एवं संबंधित स्थानों को प्रकाशित करते हैं।
गुरु वक्र (Retrograde) काल
हर वर्ष लगभग 4 माह गुरु वक्र गति में संचरण करते हैं। 2026 में कर्क में रहते हुए लगभग जुलाई मध्य से नवंबर आरंभ तक वक्र गति अपेक्षित है (सटीक तिथि के लिए पंचांग देखें)।
वक्र काल में क्या होता है?
- चल रही परियोजनाओं में पुनर्विचार, विलंब हो सकता है।
- विवाह, गृहप्रवेश जैसे मुहूर्तों के लिए वक्र गुरु काल से बचना परंपरा है।
- लेकिन आध्यात्मिक साधनाएँ, पुराण अध्ययन, गुरुजनों से मिलना — इनके लिए वक्र गुरु उत्तम है।
12 राशियों के लिए विस्तृत फल
1. मेष (Aries) — गुरु चौथे भाव में (सुख स्थान)
- करियर: वर्क फ्रॉम होम, रियल एस्टेट, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए लाभदायक।
- धन: संपत्ति लेन-देन में अच्छा लाभ। वाहन खरीदने का उत्तम समय।
- परिवार / विवाह: माता के स्वास्थ्य में सुधार। परिवार में शुभ अवसर।
- शिक्षा / संतान: उच्च शिक्षा, विदेश में पढ़ाई के अवसर। संतान से शुभ समाचार।
- स्वास्थ्य: छाती और हृदय संबंधी क्षेत्रों पर ध्यान दें — सात्विक आहार अपनाएँ।
- शुभ माह: आनि, ऐप्पसि, तई।
- उपाय: घर के उत्तर-पूर्व कोने में तुलसी रखें और दीपक जलाकर पूजा करें।
2. वृषभ (Taurus) — गुरु तीसरे भाव में (विक्रम स्थान)
- करियर: संचार, बिक्री, लेखन, मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग क्षेत्र में नए अवसर।
- धन: छोटी यात्राओं से लाभ। लेकिन आवेगी निर्णयों से बचें।
- परिवार / विवाह: भाई-बहनों के साथ संबंध प्रगाढ़ होंगे; उनकी सहायता करने का अवसर।
- शिक्षा / संतान: कौशल विकास का काल — नया कौशल / भाषा सीखें।
- स्वास्थ्य: कंधे, भुजा और कान पर ध्यान दें।
- शुभ माह: आवणि, पुरट्टासी, मासी।
- उपाय: हर गुरुवार भाई-बहनों को मिठाई दें।
3. मिथुन (Gemini) — गुरु दूसरे भाव में (धन स्थान)
- करियर: बैंकिंग, वित्त, लेखा और व्यापार क्षेत्र में लाभ। साझेदारी में सफलता।
- धन: आय बढ़ेगी। बचत योजनाएँ (PF, म्यूचुअल फंड) अच्छा रिटर्न देंगी।
- परिवार / विवाह: परिवार के साथ भोजन और मिठाई बाँटने के अवसर बढ़ेंगे।
- शिक्षा / संतान: वाक्पटुता बढ़ेगी। सार्वजनिक वक्तव्य और प्रशिक्षण में प्रगति।
- स्वास्थ्य: मुँह, गला और दाँतों पर ध्यान — अधिक मिठाई खाने से शर्करा प्रभावित हो सकती है।
- शुभ माह: आडी, पुरट्टासी, मार्गळी।
- उपाय: सत्यवादी वचन, मधुर वाणी — वाक् सिद्धि प्राप्त होगी।
4. कर्क (Cancer) — गुरु लग्न में (प्रथम भाव / जन्म गुरु)
- करियर: नेतृत्व पद, स्वरोजगार शुरू करने का स्वर्णिम अवसर। व्यक्तित्व में निखार।
- धन: नए आय के स्रोत स्वतः आएँगे। समग्र वित्तीय स्थिति में सुधार।
- परिवार / विवाह: वैवाहिक जीवन में शुभ मोड़; परिवार में मंगल कार्य।
- शिक्षा / संतान: संतान को सफलता; शिक्षक / मार्गदर्शक बनने का अवसर।
- स्वास्थ्य: सावधानी आवश्यक — परंपरागत ज्योतिष में जन्म गुरु कभी-कभी वजन वृद्धि, आलस्य, मधुमेह जैसी समस्याएँ दे सकता है; उच्च में होने से प्रभाव कम होता है, पर सजग रहें।
- शुभ माह: आनि, आवणि, कार्तिकई।
- उपाय: जन्म गुरु दोष शांति हेतु हर गुरुवार अन्नदान (चावल + घी) करें। हल्का सुपाच्य भोजन अपनाएँ।
विशेष टिप्पणी: लग्न में उच्च गुरु परम सौभाग्य है — पर जन्म गुरु के चुनौतीपूर्ण पक्ष को अनदेखा न करें। यह "शुभ लाभ + स्वास्थ्य सजगता" की दोहरी स्थिति है।
5. सिंह (Leo) — गुरु बारहवें भाव में (व्यय स्थान)
- करियर: विदेश के अवसर, आयात-निर्यात, IT, हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए अच्छा समय।
- धन: खर्च बढ़ेंगे — पर अधिकतर शुभ / धार्मिक खर्च होंगे। नया ऋण लेने से बचें।
- परिवार / विवाह: विदेश / अन्य शहरों में रहने वाले रिश्तेदारों से मिलने का अवसर।
- शिक्षा / संतान: आध्यात्मिक ग्रंथों और दर्शन में रुचि बढ़ेगी। संतान बाहर पढ़ने जा सकती है।
- स्वास्थ्य: नींद और पैर से संबंधित ध्यान दें; आँखों की थकान हो सकती है।
- शुभ माह: आवणि, मार्गळी, पंगुनी।
- उपाय: सप्ताह में एक बार मंदिर दर्शन; तीर्थ यात्रा की योजना बनाएँ।
6. कन्या (Virgo) — गुरु ग्यारहवें भाव में (लाभ स्थान) ⭐
- करियर: अत्यंत श्रेष्ठ स्थिति। पदोन्नति, नई नौकरी, व्यापार विस्तार के अवसर।
- धन: इच्छाएँ पूर्ण होंगी। निवेश अच्छा रिटर्न देंगे। पुराने ऋण चुकते होंगे।
- परिवार / विवाह: बड़े भाई-बहन / ज्येष्ठ संतान से शुभ समाचार।
- शिक्षा / संतान: संतान प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होगी।
- स्वास्थ्य: सामान्यतः अच्छा समय; नियमित व्यायाम जारी रखें।
- शुभ माह: आडी, पुरट्टासी, तई, पंगुनी।
- उपाय: आय वृद्धि के लिए हर गुरुवार लक्ष्मी-कुबेर पूजा करें।
7. तुला (Libra) — गुरु दसवें भाव में (कर्म स्थान) ⭐
- करियर: पदोन्नति, सरकारी नौकरी, नई जिम्मेदारियाँ — यह कैरियर निर्धारक काल है।
- धन: वेतन वृद्धि, प्रोत्साहन, मान्यता पुरस्कार प्राप्त होंगे।
- परिवार / विवाह: कार्य के कारण परिवार को कम समय — संतुलन पर ध्यान दें।
- शिक्षा / संतान: वरिष्ठ जनों / मेंटर से अच्छा मार्गदर्शन।
- स्वास्थ्य: कार्य दबाव — घुटने / कमर पर ध्यान दें।
- शुभ माह: वैकासी, आवणि, तई।
- उपाय: कैरियर में सफलता के लिए रविवार को आदित्य हृदयम् और गुरुवार को गुरु स्तोत्रम् पढ़ें।
8. वृश्चिक (Scorpio) — गुरु नवें भाव में (भाग्य स्थान) ⭐⭐
- करियर: भाग्य स्थान में उच्च गुरु — अपार सौभाग्य। नया क्षेत्र, नया देश — अवसर।
- धन: पैतृक संपत्ति, पारंपरिक सम्पत्ति से लाभ।
- परिवार / विवाह: पिता / गुरु / बड़ों का आशीर्वाद; विवाह के लिए शुभ काल।
- शिक्षा / संतान: उच्च शिक्षा, शोध, डॉक्टरेट के अवसर।
- स्वास्थ्य: अच्छा काल; योग और ध्यान जैसी आध्यात्मिक साधनाएँ आरंभ करें।
- शुभ माह: आनि, पुरट्टासी, मार्गळी, पंगुनी।
- उपाय: पिता / वृद्धजनों की सेवा; धार्मिक कार्यों में भागीदारी।
9. धनु (Sagittarius) — गुरु आठवें भाव में (अष्टम गुरु — चुनौतीपूर्ण स्थिति)
- करियर: अचानक परिवर्तन, स्थानांतरण हो सकता है — स्थायी निर्णय टालें।
- धन: वसीयत, बीमा, पारंपरिक संपत्ति से लाभ — पर कानूनी उलझनों से सावधान।
- परिवार / विवाह: जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
- शिक्षा / संतान: शोध, गुप्त विज्ञान, ज्योतिष, तांत्रिक विद्या में रुचि।
- स्वास्थ्य: यह आयुर स्थान है — अत्यधिक सावधानी आवश्यक। वाहन चलाते समय, शल्य चिकित्सा में सतर्कता।
- शुभ माह: आनि, आवणि, मासी।
- उपाय: अष्टम गुरु दोष निवारण हेतु हर गुरुवार आलंगुडी गुरु मंदिर दर्शन, गुरु पाद पूजा करें। महामृत्युंजय मंत्र प्रतिदिन 11 बार जपें।
10. मकर (Capricorn) — गुरु सातवें भाव में (कलत्र स्थान) ⭐
- करियर: साझेदारी में उत्तम काल। विदेशी ग्राहक, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।
- धन: जीवनसाथी / व्यापार भागीदार के माध्यम से लाभ।
- परिवार / विवाह: विवाह की तलाश में हैं तो स्वर्णिम वर्ष। विवाहित दंपतियों में प्रेम बढ़ेगा।
- शिक्षा / संतान: परामर्श, मनोविज्ञान, विधि क्षेत्र में सफलता।
- स्वास्थ्य: गुर्दे और कूल्हे पर ध्यान — मिठाई सीमित रखें।
- शुभ माह: वैकासी, आडी, कार्तिकई।
- उपाय: दंपति मिलकर गुरुवार शाम लक्ष्मी-नारायण पूजा करें।
11. कुम्भ (Aquarius) — गुरु छठे भाव में (रिपु / रोग स्थान — मिश्र फल)
- करियर: प्रतिद्वंद्वियों पर विजय; पर कार्यभार बढ़ेगा।
- धन: वेतन बढ़ेगा; पुराने ऋण / EMI चुकाने का अवसर।
- परिवार / विवाह: छोटे-मोटे मतभेद — धैर्य आवश्यक।
- शिक्षा / संतान: मामा / चाचा के परिवार में शुभ अवसर।
- स्वास्थ्य: चुनौतीपूर्ण स्थिति — पुरानी स्वास्थ्य समस्याएँ लौट सकती हैं; शर्करा, रक्तचाप की नियमित निगरानी।
- शुभ माह: आडी, पुरट्टासी, पंगुनी।
- उपाय: हर गुरुवार नमक रहित व्रत रखें; निर्धनों को भोजन दान करें।
12. मीन (Pisces) — गुरु पाँचवें भाव में (पुत्र स्थान / पूर्व पुण्य स्थान) ⭐⭐
- करियर: सृजनशीलता का काल — कला, संगीत, लेखन, कंटेंट क्रिएशन — उत्तम समय।
- धन: शेयर बाजार / सट्टे में संयम बरतें — भाग्य साथ है पर नियंत्रण आवश्यक।
- परिवार / विवाह: संतान संबंधी शुभ समाचार (नया शिशु, संतान की सफलता)।
- शिक्षा / संतान: आपकी संतान शिक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करेगी। प्रेम, विवाह से शुभ समाचार।
- स्वास्थ्य: अच्छा काल; पेट / लीवर पर ध्यान (मिठाई सीमित रखें)।
- शुभ माह: वैकासी, आनि, ऐप्पसि, तई।
- उपाय: संतान कल्याण के लिए संतान गोपाल मंत्र और विष्णु सहस्रनाम का जप करें।
सारांश — राशिवार फल तालिका
| राशि | गुरु का स्थान | फल प्रकार | मुख्य ध्यान |
|---|---|---|---|
| मेष | 4 | अनुकूल | घर, वाहन, माता |
| वृषभ | 3 | अनुकूल | संचार, साहस |
| मिथुन | 2 | अनुकूल | आय, परिवार |
| कर्क | 1 (जन्म) | अनुकूल + चुनौती | व्यक्तित्व ↑, स्वास्थ्य सजगता |
| सिंह | 12 | मिश्र | खर्च, विदेश |
| कन्या | 11 | अति अनुकूल ⭐ | लाभ, बचत |
| तुला | 10 | अति अनुकूल ⭐ | पद, यश |
| वृश्चिक | 9 | अति अनुकूल ⭐⭐ | भाग्य, शिक्षा |
| धनु | 8 (अष्टम) | चुनौतीपूर्ण | स्वास्थ्य, दुर्घटना सावधानी |
| मकर | 7 | अनुकूल ⭐ | विवाह, साझेदारी |
| कुम्भ | 6 | मिश्र | कार्य सफलता + स्वास्थ्य |
| मीन | 5 | अति अनुकूल ⭐⭐ | संतान, सृजनशीलता |
गुरु पेयर्ची के दिन — क्या करें
- प्रातःकाल उठकर शिरोस्नान करें; पीले / स्वर्णिम वस्त्र पहनें।
- घर / मंदिर में घी का दीपक जलाकर गुरु भगवान की पूजा करें।
- गुरु गायत्री 9 / 27 / 108 बार जप करें।
- केला, चना दाल, पीले वस्त्र — दान करें।
- गुरुजनों (शिक्षक, बुजुर्ग, माता-पिता) को प्रणाम कर आशीर्वाद लें।
- आलंगुडी गुरु मंदिर दर्शन — यदि संभव हो तो सशरीर, अन्यथा ऑनलाइन दर्शन।
क्या न करें
- गोचर के समय यात्रा, नया अनुबंध, ऋण लेना — बचें।
- मद्य और मांसाहार पूर्णतः त्यागें।
- गुरुजनों और बुजुर्गों का अपमान — गंभीर दोष।
- दूसरों को धोखा देना, झूठे वादे — गुरु कोप।
- वक्र गुरु काल में विवाह / गृहप्रवेश मुहूर्त — बचें।
उपाय (Remedies)
1. साप्ताहिक — गुरुवार व्रत
- प्रातःकाल उठकर शिरोस्नान, पीले वस्त्र पहनें।
- दिन में नमक रहित एक वेळा भोजन — चना दाल, केला, दूध, शहद, हल्दी चावल।
- शाम को गुरु स्तोत्रम् / गुरु अष्टोत्तरम् पढ़कर घी का दीपक जलाएँ।
2. मंत्र
मूल मंत्र:
ॐ क्रीं बृहस्पतये नमः — प्रतिदिन 108 बार जप
गुरु गायत्री:
ॐ वृषभध्वजाय विद्महे | करुणि हस्ताय धीमहि | तन्नो गुरुः प्रचोदयात् ||
गुरु बीज मंत्र:
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
3. आलंगुडी दर्शन (नवग्रह गुरु स्थल)
- तंजावूर जिले का आलंगुडी अपत्सहायेश्वरर मंदिर — नवग्रह गुरु स्थल।
- गुरुवार या पुनर्वसु / विशाखा नक्षत्र के दिनों में दर्शन विशेष फलदायी।
- चना दाल माला, पीले वस्त्र, केला, दूध — अर्चना सामग्री।
4. पुखराज (Yellow Sapphire)
- गुरु का रत्न — सोने में जड़वाकर दाहिने हाथ की तर्जनी उँगली में धारण करें।
- भार: लगभग 3 से 5 रत्ती (3.6 – 6 कैरेट) — शारीरिक भार अनुसार।
- गुरुवार, पुनर्वसु / पुष्य / विशाखा / पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के दिन पहली बार धारण करें।
- सावधानी: केवल उपयुक्त लग्नों के लिए — सामान्यतः मेष, सिंह, धनु, मीन, कर्क लग्न वालों के लिए उचित। अन्य ज्योतिषी से परामर्श लें।
5. कमजोर / नीच गुरु वाले जातकों के लिए अतिरिक्त उपाय
- 40 दिनों तक लगातार गुरु पाद पूजा (गुरु / शिक्षक / माता-पिता के चरण पूजन)।
- सप्ताह में एक बार विष्णु सहस्रनाम पाठ।
- पीली गाय को केला / गुड़ खिलाएँ।
- शिक्षा संस्थानों को पुस्तक दान; छात्रों को शैक्षिक सहायता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. 2026 गुरु पेयर्ची कब होता है? मई–जून 2026 (वैशाख – ज्येष्ठ माह) में गुरु मिथुन से कर्क में प्रवेश करते हैं। सटीक तिथि और समय के लिए अपने क्षेत्र का पंचांग देखें।
2. गुरु कर्क में कितने दिन रहेंगे? लगभग एक वर्ष — मई 2026 से मई 2027 तक (बीच में कुछ माह वक्र गति)।
3. इस काल में विवाह / गृहप्रवेश कर सकते हैं? हाँ, यह उत्तम काल है — उच्च गुरु की दृष्टि शुभ मुहूर्तों के लिए वरदान। लेकिन वक्र गुरु काल से बचकर मुहूर्त निश्चित करें।
4. किन राशियों के लिए यह काल सर्वोत्तम है? वृश्चिक (9), मीन (5), कन्या (11), तुला (10), मकर (7) राशि वालों के लिए स्वर्णिम काल। कर्क (जन्म गुरु), धनु (अष्टम), कुम्भ (रिपु) राशि वालों को अतिरिक्त उपाय करना चाहिए।
5. अष्टम गुरु (धनु) क्या है, क्या करें? जातक के आठवें भाव में गुरु का संचरण — स्वास्थ्य, अचानक परिवर्तनों में सतर्कता। आलंगुडी दर्शन, महामृत्युंजय जप, गुरुवार व्रत नियमित करें।
6. वाहन / संपत्ति खरीद सकते हैं? हाँ — विशेषकर मेष, कन्या, तुला, मकर, मीन राशि वालों के लिए उपयुक्त काल। लेकिन जातक में शनि / राहु की स्थिति भी देखकर निर्णय लें।
आपके जातक में गुरु कहाँ हैं?
ये 12 राशि फल चन्द्र राशि (Moon Sign) के आधार पर सामान्य मार्गदर्शन हैं। पूर्ण फल निर्धारण इन पर निर्भर करता है:
- आपका लग्न (Ascendant)
- जातक में गुरु की मूल स्थिति (कौन सा भाव, कौन सी राशि, क्या दृष्टि)
- चल रही दशा-भुक्ति (विंशोत्तरी दशा)
- नक्षत्र स्तरीय फल (प्रत्येक राशि में 2¼ नक्षत्र)
ये सभी मिलकर ही बताते हैं कि "आपके लिए" यह उच्च गुरु क्या देने वाला है।
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ॐ गुरवे नमः। गुरु भगवान सभी को ज्ञान, समृद्धि और दीर्घायु प्रदान करें।